
राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। सोमवार की सुबह जैसे ही सूरज उगा, पूरा शहर स्मॉग की चादर में लिपटा दिखा। एम्स के आसपास एक्यूआई 378 और इंडिया गेट पर 326 दर्ज किया गया — यानी ‘सांस लो तो रिस्क फ्री नहीं’ जोन में दिल्ली पहुंच चुकी है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स: कौन कितना जहरीला?
| इलाका | AQI स्तर | श्रेणी |
|---|---|---|
| एम्स | 378 | बहुत खराब |
| आनंद विहार | 379 | बहुत खराब |
| इंडिया गेट | 326 | खराब |
| पंजाबी बाग | 416 | गंभीर |
| जहांगीरपुरी | 413 | गंभीर |
| बवाना | 416 | गंभीर |
| नेहरू नगर | 408 | गंभीर |
लगता है अब “दिल्ली का दिल” भी PM2.5 से धड़कने लगा है!
पीएम10 और पीएम2.5 का हाल
सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक हवा में पीएम10 की मात्रा 316.4 और पीएम2.5 189.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुई।
वैज्ञानिकों के मुताबिक—“ये हवा फेफड़ों के लिए नहीं, सिर्फ यादों के लिए सही है।”
AAP vs Government: डेटा भी अब प्रदूषित!
आम आदमी पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह AQI डेटा में हेरफेर कर रही है। सौरभ भारद्वाज बोले—“जहां AQI ज्यादा है, वहां मॉनिटर बंद कर दिए गए हैं।” मतलब अब हवा नहीं, आंकड़े भी साफ-सुथरे दिखाने का खेल चल रहा है!
GRAP-3 की आहट
केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) GRAP-3 लागू करने पर विचार कर रहा है। अगर AQI 400 पार गया (जो हो चुका है), तो स्कूलों में फिर हाइब्रिड क्लासेस और निर्माण कार्यों पर रोक लग सकती है।सिंपल शब्दों में—“अब ना बिल्डिंग बनेगी, ना बच्चे खुली हवा में दौड़ेंगे।”

लगातार 26 दिन से जहरीली हवा
दिल्ली में 14 अक्टूबर से लेकर अब तक हवा “खराब” या “बेहद खराब” श्रेणी में है। इस बीच लोगों ने जिम छोड़कर एयर प्यूरीफायर को ही नया फिटनेस पार्टनर बना लिया है।
वजह वही—वाहन, मौसम और ‘विकास’
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वाहनों से निकलता धुआं और मौसम की ठंडक मिलकर स्मॉग का स्वाद बढ़ा रही है। कंस्ट्रक्शन, इंडस्ट्री और पटाखों का तड़का इसे “दिल्ली स्पेशल” बना रहा है।
दिल्ली-NCR का हाल
- नोएडा सेक्टर-62: 405 AQI (गंभीर)
- वसुंधरा: 403 AQI
- गाजियाबाद: 345 AQI
अब पूरा NCR एक ‘फिल्टरलेस इंस्टाग्राम’ बन चुका है—जहां फोटो में धुंध और सांसों में संघर्ष है।
दिल्ली की हवा में अब ऑक्सीजन से ज्यादा राजनीतिक बयान और प्रदूषण के पार्टिकल हैं। अगर ऐसे ही चला तो आने वाले दिनों में दिल्ली का नया नारा होगा— “Dilwalo Ki Dilli Nahi, Maskwalo Ki Dilli!”
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